वर्तमान बच्चों को नैतिक शिक्षा की जरूरत

वर्तमान समय में सत्ता और शक्ति का स्रोत आम आदमी हैं | मनुष्य अपना जीवन अपनी मर्जी से अपनी शर्तों पर जीना चाहता हैं  जिससे कि वह सही और गलत में अंतर नहीं कर पाता | आधुनिक जीवन शैली के नशे में डूबे लोग गलत कार्यों को भी सही ठहराने लगते हैं | लोगों में शराब और नशे के प्रति बढ़ता रुझान इस बात का सबूत हैं | देर से जागना, देर से सोना, नशा करना, तेज रफ्तार से गाड़ी चलाना,  खराब चरित्र सबको एक तर्क से सही ठहराया जाता है कि “मैं अपना जीवन अपने तरीके से जिऊंगा |” ऐसे में नैतिकता की बातें उनको कोरी बकवास लगती है | ऐसे हालातों में समाज के जिम्मेदार नागरिकों का उत्तरदायित्व बढ़ जाता हैं | माता पिता बच्चों को व्यक्तिगत आजादी की सीमा बताएं तथा सामाजिक जिम्मेदारियों का एहसास कराए | शिक्षक विद्यार्थियों को परिवार, समाज और देश के प्रति उनकी जिम्मेदारियों, कर्तव्यों तथा मूल्यों से समय समय पर अवगत करवाते रहें | जाहिर है कि शिक्षकों द्वारा दी हुई नैतिक शिक्षा बच्चों के चरित्र को मजबूत बनाती है जो कि आज के समाज की जरूरत बन गई हैं |
मुकेश कुमावत बोराज, जयपुर

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